welcome

welcome..

Saturday, February 6, 2010

pahli kavita

विरह के साये घनेरे
मुझे तेरी स्मृति घेरे
(साभार वेदिका)

विरह के साये घनेरे
मुझे तेरी स्मृति घेरे
तू साथ है तो मेरी दुनिया रोशन
बिन तेरे हैं घने अँधेरे
हर ख्याल में तेरा ही ख्याल है
दोस्तों से भी हैं तो सिर्फ जिक्र तेरे
तू समझ भी न पाए शायद कभी
बिन सोये देखे हैं कितने सवेरे ..