मुझे तेरी स्मृति घेरे
(साभार वेदिका)
विरह के साये घनेरे
मुझे तेरी स्मृति घेरे
तू साथ है तो मेरी दुनिया रोशन
बिन तेरे हैं घने अँधेरे
हर ख्याल में तेरा ही ख्याल है
दोस्तों से भी हैं तो सिर्फ जिक्र तेरे
तू समझ भी न पाए शायद कभी
बिन सोये देखे हैं कितने सवेरे ..
मुझे तेरी स्मृति घेरे
तू साथ है तो मेरी दुनिया रोशन
बिन तेरे हैं घने अँधेरे
हर ख्याल में तेरा ही ख्याल है
दोस्तों से भी हैं तो सिर्फ जिक्र तेरे
तू समझ भी न पाए शायद कभी
बिन सोये देखे हैं कितने सवेरे ..
तू समझ भी न पाए शायद कभी
ReplyDeleteबिन सोये देखे हैं कितने सवेरे ....
bahut khoobsurti se dard paribhasit kiya hai
priyanka ji....best wishes!!!
हर रंग को आपने बहुत ही सुन्दर शब्दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्तुति ।
ReplyDeleteएहसास की यह अभिव्यक्ति बहुत खूब
ReplyDeleteकिसी के करीब होने का कितना अच्छा एहसास है ! बेहतरीन रचना !
ReplyDeleteबेहतरीन एहसासो से भरी रचना...... पर आगे लेखनी गुम है...... लिखती रहिये....
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