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Saturday, February 6, 2010

pahli kavita

विरह के साये घनेरे
मुझे तेरी स्मृति घेरे
(साभार वेदिका)

विरह के साये घनेरे
मुझे तेरी स्मृति घेरे
तू साथ है तो मेरी दुनिया रोशन
बिन तेरे हैं घने अँधेरे
हर ख्याल में तेरा ही ख्याल है
दोस्तों से भी हैं तो सिर्फ जिक्र तेरे
तू समझ भी न पाए शायद कभी
बिन सोये देखे हैं कितने सवेरे ..

5 comments:

  1. तू समझ भी न पाए शायद कभी
    बिन सोये देखे हैं कितने सवेरे ....

    bahut khoobsurti se dard paribhasit kiya hai
    priyanka ji....best wishes!!!

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  2. हर रंग को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  3. एहसास की यह अभिव्यक्ति बहुत खूब

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  4. किसी के करीब होने का कितना अच्छा एहसास है ! बेहतरीन रचना !

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  5. बेहतरीन एहसासो से भरी रचना...... पर आगे लेखनी गुम है...... लिखती रहिये....

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